"इतनी शक्ति हमें देना दाता"


"इतनी शक्ति हमें देना दाता"

***राजीव तनेजा***

"उम्र में छोटा हुआ तो क्या हुआ?"...

"अपनी करनी से तो बडे बडों के कान कतर डाले उसने"..

"छोटी उम्र में ही उसने ऐसा कर दिखाया कि बडे-बडे भी पानी भर उठें...शरमा उठें"

"सूरमा घबरा जाएँ"...

"अच्छे अच्छों के कलेजे दहल उठें"...

"आम आदमी के रौंगटे खडे हो जाएँ"


"कुछ सोच के ही किया होगा उसने ये सब"...

"कुछ तो वजह रही होगी इस सब की"...


"शायद!..भीड में सबसे अलग...सबसे जुदा दिखने की चाहत"...

"सैलीब्रिटी बनने का अरमाँ संजोया होगा"..


"या!..हो सकता है कि सामने वाले ने उसके जोश...उसके ज़मीर को ललकारा हो और...

ये अपने होश-ओ-हवास पे काबू न रख पाया हो"


"बौखला कर उसका काम तमाम करने की ठान ली होगी लेकिन शायद फिर कुछ सोच के रुक गया होगा"

"शायद उसका अंतर्मन गवाही न दे रहा हो इस सब की"

"अंतर्द्व्द्व चल रहा होगा उसके भीतर कि क्या करे और...क्या न करे"


"खूब उठा पटक...खूब बहस हुई होगी उसके अन्दर"...

"क्या सही है?और...क्या गलत?"...

"फैसला नहीं कर पा रहा होगा वो"

"कभी अच्छाई हावी होती होगी तो...कभी बुराई"...

"कभी आशा हावी होती होगी तो..कभी निराशा"


"धोबी पछाड से लेकर एक से एक नए-पुराने दाव चले जा रहे होंगे"...


"लेकिन अफसोस!..आखिर वही हुआ जिसका अन्देशा था"...

"बुराई ने अच्छाई पे काबू पा लिया"...

"हावी हो गयी उस पर"...


"खासी कश्मकश...खासी रस्साकशी चली होगी"...

"तब जा के फैसला हुआ होगा कि कौन जीता और...कौन हारा"


"ऐसा फैसला..ऐसा निर्णय लेने से पहले ...करने से पहले...

उसका मन पता नहीं कितनी दुविधाओं...कितनी मुश्किलों को पार करता हुआ सीना तान आगे बढा होगा"...


"कैसे कैसे तर्क-वितर्क कर चुप बिठाया होगा अच्छाई को"


"फिर खुद को अकेला जान इरादा छोद दिया हो शायद"...

"आडे वक्त पे दोस्त ही दोस्त के काम आता है"...

"एक से भले दो"...

"ये दोस्ती ...हम नहीं तोडेंगे...तोडेंगे उम्र भर"

"अच्छे में...बुरे में ...

हर जगह साथ निभाने का वायदा निभा उन दोनों ने एक नई मिसाल कायम कर दी"


"डगमगाते कदमों को थामने के लिए उन्होंने ऊपरवाले को ताका होगा"...

"इतनी शक्ति हमें देना दाता....मन का विश्वास कमज़ोर हो ना"...

"नतीजन!..मन स्फूर्ति..जोश...आत्म-विश्वास से लबालब भर गया होगा"


"शायद!..शह तो उसे अपने घर से ही मिली होगी इस सब की"

"पता होगा अपने माँ-बाप की लापरवाही भरी आदतों का"..

"यकीन होगा कि आसानी से हासिल कर पाएगा तमंचा"

"पूर्ण विश्वास होगा कि हमेशा की तरह इधर-उधर ही पडा मिल जाएगा"


"शायद!..शराब और पैसे के नशे में चूर अपने बडों से घर में ही सीखा होगा चलाना"

"वही उसके गुरू...वही मार्गदर्शक रहे होंगे उसके"..

"पहली सीख...पहला सबक...वहीं से मिला होगा उसे"

"उन्हीं से सीखा होगा बात-बेबात अकड कर रहना"...

"इंसान को इंसान न समझना"..


"वहीं मालुम हुआ होगा कि..मृत्यु क्षणभंगुर है"...

"शरीर मिट्टी का बना है...नश्वर है"

"उन्हीं से पता चला होगा कि....जो आया है ..उसे जाना है"...

"कोई दो दिन पहले चला जाता है तो...कोई दो दिन बाद में"...


"कहने वाले ये भी कह सकते हैँ कि ऊपर बैठी उस अपरंपार शक्ति ने खुद ही...

उसे ये नेक...ये महान काम सौंपा हो"


"समय पूरा हो गया होगा उसका"

"इसी के हाथों मौत लिखी होगी उसकी"

"इतनी ही उम्र लिखा के आया होगा वो"

"साधन मात्र ही बनाया होगा उसने"...

"कठपुतली बन इशारों पे नचाया होगा उसने"..


"बस!..तेरह साल की उम्र लेकर आया हो वो इस दुनिया में"

"ये भी हो सकता है कि इंसानियत के भले के लिए उसका जाना ही बेहतर हो"

"कईयों से ये भी तो सुना है कि अच्छे लोगों की ऊपर भी ज़रूरत होती है"...

"इसलिए बुलवा लिया होगा उसे अपने पास"...


"गीता में भी लिखा है कि...

जो हुआ है...जो हो रहा है...जो होना है...सब पहले से तय है...फिक्स है"...

"उसके लिखे से छेडछछाड असंभव है"

"यही भाग्य रहा होगा उसका"


"जैसे कर्म करेगा वैसे फल देगा भगवान..ये है गीता का ज्ञान"


"हो सकता है कि ये उन दोनों के पिछले कर्मों का फल मात्र ही हो"...

"ऊपरवाले से यही प्रार्थना है कि...

वो 'यूरो इंटरनैशनल स्कूल'के मरने वाले छात्र की आत्मा को शांति दे और मारने वाले दोनों छात्रों को सदबुद्धी"

***राजीव तनेजा***

2 comments:

Keerti Vaidya said...

hahaaaa...really bhut acha likhtey hai aap,,,

शास्त्री जे सी फिलिप् said...

प्रिय राजीव,

पिछले कुछ हफ्ते काफी व्यस्त रहे अत: लगभग 2 हफ्ते के बाद आपके चिट्ठे पर आना हुआ. आज चालू ही इससे किया. अच्छा लगा. कई कारण हैं:

*** लेखों की लम्बाई अब ठीक है

*** विषय हमेशा के समान दिलचस्प हैं

लिखते रहें !!

-- शास्त्री

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