मेरी आठवीं कहानी नवभारत टाईम्स पर

पहली कहानी- बताएँ तुझे कैसे होता है बच्चा

दूसरी कहानी- बस बन गया डाक्टर

तीसरी कहानी- नामर्द हूँ,पर मर्द से बेहतर हूँ

चौथी कहानी- बाबा की माया

पाँचवी कहानी- व्यथा-झोलाछाप डॉक्टर की

छटी कहानी-काश एक बार फिर मिल जाए सैंटा

सातवीं कहानी-थमा दो गर मुझे सत्ता

आठवी कहानी- मेड फॉर ईच अदर

 


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मेड फॉर ईच अदर
14 Mar 2009, 1538 hrs IST,नवभारतटाइम्स.कॉम 

राजीव तनेजा


हेलो। मे आई स्पीक टू मिस्टर राजीव तनेजा ? यस , स्पीकिंग। सर , मैं रिया बोल रही हूं। फ्लाना एंड ढीमका बैंक से। हां जी , बोलिए। सर , वी आर प्रवाइडिंग होम लोन एट वेरी रीज़नेबल रेट्स। सॉरी मैडम , आई एम नॉट इंटरेस्टिड। सर , बहुत अच्छी स्कीम दे रही हूं आपको।
हां जी , बताएं। सर , हम आपको बहुत ही कम ब्याज पर लोन प्रवाइड कराएंगे। अभी कहा न आपको कि नहीं चाहिए। सर , पहले मेरी पूरी बात सुन लें। प्लीज़ , अच्छा फटाफट बताएं , मैं रोमिंग में हूं। सर , आप अगर हमसे लोन लेते हैं तो उसका सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि समय पर किश्त न चुका पाने की कंडीशन में हम आपके घर अपने गुंडे और बदमाश नहीं भेजते हैं।

ओह , अच्छा ! फिर तो ठीक है। एक्चुअली , मुझे गुंडों और उनकी मार - कुटाई से बड़ा डर लगता है। यू नो , एक बार मेरे दोस्त कम पड़ोसी कम रिश्तेदार के घर पर काफी तोड़फोड़ और हंगामा कर गए थे। सर , वे उस एक्स कम्पनी के रिकवरी एजंट होंगे। यह तो पता नहीं। दरअसल , वे हैं ही बड़े बेकार लोग। बिना वजह कस्टमर्स को तंग करते हैं।

यह भी नहीं जानते कि ग्राहक तो भगवान का रूप होता है और कोई अपनी मर्ज़ी से थोड़े ही फंसता है , बैंकों के जाल में। ऊपर से बाज़ार में मंदा - ठंडा तो चलता ही रहता है। थोड़ा सब्र तो उन्हें रखना ही चाहिए कि कोई उनके पैसे खा थोड़े ही जाएगा। वैसे हमारे बैंक से लोन लेने के बाद तो वैसे भी आदमी किश्तें चुकाते - चुकाते अपने ही कष्टों से मर जाता है। ही ... ही .... ही ..

क्या ? प्लीज़ , आप माइंड न करें। आप इतना सब उल्टा - सीधा बके चली जा रही हैं और मुझे कह रही हैं कि माइंड न करें। एक्चुअली , इट वॉज़ अ पी . जे। पी . जे माने ? प्योर जोक ... प्रैक्टिकल जोक। ओह , फिर तो आप बड़े ही खतरनाक जोक मारती हैं मिस पिंकी। सर यह तो कुछ भी नहीं , मेरे जोक्स के आगे तो बड़े - बड़े हिल जाया करते हैं। ओह , रियली ? जी और सर , मेरा नाम पिंकी नहीं बल्कि रिया है। ओह , फिर तो आपने ठीक किया। क्या ठीक किया सर ?

यही कि अपना नाम बता दिया। वर्ना बेवजह कन्फ्यूज़न क्रिएट होता रहता। किस तरह का कन्फ्यूज़न सर ? एक्चुअली फ्रैंकली स्पीकिंग , इस तरह के दो - चार फोन तो रोज़ ही आ जाते हैं ना ! तो तो सबके नाम याद करने में अच्छी - खासी मुश्किल पेश आ जाया करती है। सर , जब आप हमसे एक बार लोन ले लेंगे न तो फिर कभी भी मेरा नाम नहीं भूल पाएंगे। और वैसे भी मैं भूलने वाली चीज़ नहीं हूं सर। जी , यह तो आपकी बातों से ही मालूम चल गया है। क्या मालूम चल गया है सर ?

यही कि आप बातें बड़ी दिलचस्प करती हैं। थैंक्स फॉर दा कॉम्प्लिमंट सर। एक्चुअली फ्रैंकली स्पीकिंग , यू हैव ए वेरी स्वीट एंड सेक्सी वॉयस। झूठे। फ्लर्ट करना तो कोई आप मर्दों से सीखे। प्लीज़ , इसे झूठ न समझें। सच में आपकी आवाज़ बड़ी ही मीठी और सुरीली है। तुम्हारी कसम। अच्छा जी , अभी मुझसे बात करते हुए सिर्फ आपको यही कोई दस - बारह मिनट हुए हैं और आप मेरी कसमें भी खाने लगे।

एक्चुअली , रिया वह क्या है कि किसी को समझने में पूरी उम्र बीत जाया करती है और किसी को जानने के लिए सिर्फ चंद सेकंड ही काफी होते हैं। यू नो , जोड़ियां ऊपर से ही बन कर आती हैं। जी , बात तो आप सही कह रहे हैं। सर ! वैसे आप रहते कहां हैं ? जी , शालीमार बाग। वहां तो प्रॉपर्टी के बहुत ज़्यादा रेट होंगे न सर ? जी , यही कोई सवा लाख रुपये गज के हिसाब से सौदे हो रहे हैं आजकल और अभी परसों ही डेढ़ सौ गज में बना एक सेकंड फ्लोर बिका है पूरे अस्सी लाख रुपये का।
गुड , मैं भी सोच रही थी कोई सौ - पचास गज का प्लॉट ले कर डाल दूं। आने वाले समय में कुछ न कुछ मुनाफा दे कर ही जाएगा। बिलकुल सही सोचा है आपने। किसी भी और चीज़ में इनवेस्ट करने से अच्छा है कि कोई प्लॉट या मकान खरीद कर रख लिया जाए। लेकिन , मुझे यह फ्लोर - फ्लार का चक्कर बेकार लगता है।

ये भी क्या बात हुई कि नीचे कोई और रहे और ऊपर कोई और। ऊपर छत पर सर्दियों में धूप सेंकनी हो या फिर पापड़ - वड़ियां सुखाने हों तो बस दूसरों के मोहताज हो गए हम तो। जी , ये बात तो है। इसमें कहां की अक्लमंदी है कि ज़रा - ज़रा से काम के लिए दूसरों को डिस्टर्ब कर उनकी घंटी बजाते रहो। जी , बिलकुल सही कहा सर आपने। सर , आप बुरा न मानें तो एक बात पूछूं ? अरे यार , इसमें बुरा मानने की क्या बात है ? हक बनता है आपका। आप एक - दो क्या पूरे सौ सवाल पूछें तो भी कोई गम नहीं।
ये नाचीज़ आपकी सेवा में हमेशा हाज़िर रहेगा। टीं ... टीं ... बीप ... बीप ... बीप। ओह , लगता है कि बैलंस खत्म होने वाला है। मैं बस दो मिनट में ही रिचार्ज करवा कर आपको फोन करता हूं। हां , चिंता न करें मैं नम्बर सेव कर लूंगा। नहीं आप रहने दें , मैं ही कर लूंगी। हमें वैसे भी अपना दिन का टारगिट पूरा करना होता है।

ओ . के। ( दस मिनट बाद ) हैलो , राजीव ? हां जी। और सुनाएं , क्या हाल - चाल हैं ? बस , क्या सुनाएं ? कट रही है जैसे तैसे। ऐसे क्यों बोल रही हो यार ? बस ऐसे ही , कई बार लगता है कि जैसे जीवन में कुछ बचा ही नहीं है। चिंता ना करो , मैं हूं ना ? सब ठीक हो जाएगा।

कुछ ठीक नहीं होने वाला है। थोड़ी - बहुत ऊंच - नीच तो सब के साथ लगी रहती है। इनसे घबराने के बजाए इनका डट कर मुकाबला करना चाहिए। जी , खैर आप बताएं। क्या पूछना चाहती थीं आप ?
नहीं , रहने दें। फिर कभी , किसी अच्छे मौके पे। आज से अभी से अच्छा मौका और क्या होगा ? आज ही आपसे पहली बार बात हुई और आज ही आपसे दोस्ती हुई। और वैसे भी दोस्ती में कोई शक नहीं रहना चाहिए।

जी , सही कहा आपने। सर , मैं यह कहना चाहती थी कि ... । पहले तो आप ये सर ... सर लगाना छोड़ें। एक्चुअली , टू बी फ्रैंक बड़ा अजीब सा फील होता है जब कोई अपना इस तरह फॉरमैलिटी भरे लहज़े में बात करे। आप मुझे सीधे - सीधे राजीव कह कर पुकारें। जी सर , ऊप्स सॉरी राजीव।

हा हा हा हा ... एक्चुअली क्या है राजीव कि मैंने कभी किसी से ऐसे ओपनली फ्री हो कर बात नहीं की है। हमें हमारे प्रफेशन में सिखाया भी यही गया है कि सामने वाला बंदा कैसा भी घटिया हो और कैसे भी कितना भी रूडली बात करे , लेकिन हमें अपनी पेशंस अपने धैर्य को नहीं खोना है और अपने चेहरे पर हमेशा मुस्कान बना कर रखनी है।

हमारी आवाज़ से किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि हमारे अन्दर क्या चल रहा है। यू नो प्रफेशनलिज़म। सही ही है , अगर आप लोग अपने कस्टमर्स के साथ बदतमीज़ी के साथ पेश आएंगे तो अगला पूरी बात सुनने के बजाए झट से फोन काट देगा। वही तो ...

हां तो आप बताएं कि आप क्या पूछना चाहती थीं ? राजीव , किसी और दिन पर क्यों न रखें यह टॉपिक ? देखो , जब मैंने तुम्हें दिल से अपना मान लिया है तो हमारे बीच कोई पर्दा कोई दीवार नहीं रहनी चाहिए। जी , तो फिर पूछो न यार , क्या पूछना है आपको ? मैं तो सिम्पली बस यही जानना चाहती थी कि यहां शालीमार बाग में आपका अपना मकान है या फिर किराए का ? यार , यह किराया - विराया देना तो मुझे शुरू से ही पसन्द नहीं। इसलिए तो पांच साल पहले पिताजी का जमा - जमाया टिम्बर का बिज़नस छोड़ मैं अमृतसर से भाग कर दिल्ली चला आया कि कौन हर महीने किराया भरता फिरे ?

और आज देखो , अपनी मेहनत से मैंने सब कुछ पा लिया है। मकान , गाड़ी ... । ओह , तो इसका मतलब खूब तरक्की की है जनाब ने दिल्ली आने के बाद। बिलकुल , लाख मुश्किलें आई मेरे सामने लेकिन ज़मीर गवाह है मेरा कि मैंने कभी हार नहीं मानी और कभी ऊपरवाले पर अपने विश्वास को नहीं खोया। उसी ने दया - दृष्टि दिखाई अपनी। वर्ना मैं तो कब का थक - हार के टूट चुका होता और आज यहां दिल्ली में नहीं बल्कि वापस अमृतसर लौट गया होता। .. ऐसे नहीं बोलते , अब मैं हूं न तुम्हारे साथ। तुम्हारे हर दुख हर दर्द की साथिन।

वैसे कितने कमरे हैं आपके मकान में ? क्यों ? क्या हुआ ? कुछ नहीं , वैसे ही पूछ लिया। पूरे छह कमरों का सेट है। छह कमरे ? वाऊ ... दैट्स नाइस। लेकिन आप इतने कमरों का क्या करते हैं ? क्या बीवी ... बच्चे ? कहां यार , अभी तो मैं कुंवारा हूं। व्हाट अ लवली कोइंसीडंस , मैं भी अभी तक कुंवारी हूं। फिर तो खूब मज़ा आएगा जब मिल बैठेंगे कुंवारे दो। जी बिलकुल , लेकिन आप अकेले इतने कमरों का करते क्या हैं ?
दो तो मैंने अपने पास रखे हैं और एक मेहमानों के लिए। बाकी के तीन कमरे , वो क्या है कि कई बार मैं अकेला बोर हो जाता हूं इसलिए फिलहाल किराए पर चढ़ा रखा है। ठीक किया। थोड़ी - बहुत आमदनी भी हो जाती होगी और अकेले बोर होने से भी बच जाते होंगे। जी। लेकिन अब चिंता न करें , मैं आपको बिलकुल भी बोर न होने दूंगी। जब कभी भी ज़रा सा भी लगे कि आप बोर हो रहे हैं तो आप कभी भी किसी भी वक्त मुझे फोन कर दिया करें। मेरा वायदा है आपसे कि आप मेरी कम्पनी को पूरा एंजाय करेंगे।

जी , ज़रूर। शुक्रिया। दोस्ती में ... प्यार में ... नो थैंक्स ... नो शुक्रिया। बातों ही बातों में मैं ये पूछना तो भूल ही गया कि आप कहां रहती हैं ? घर में कौन - कौन हैं वगैरह। अब क्या बताऊं , घर में मां - बाप और बस हम तीन बहनें हैं। सबसे छोटी , सबसे लाडली और सबसे नटखट मैं ही हूं। और घर ? रहने को फिलहाल मैं जहांगीर पुरी में रह रही हूं। वह जो साईड पर लाल रंग के फ्लैट बने हुए हैं ? नहीं यार , जे . जे . कॉलनी में रह रही हूं। गुस्सा तो मुझे बहुत आता है अपने मम्मी - पापा पर कि उन्हें यही सड़ी सी कॉलनी मिली थी रहने के लिए , लेकिन क्या करूं मां - बाप हैं मेरे। बचपन से पाला - पोसा , पढ़ाया - लिखाया उन्होंने। उनके सामने फालतू बोलना ठीक नहीं।
खैर , आप बताएं , क्या - क्या आपकी हॉबीज़ हैं ? मुझे बढ़िया खाना , बढ़िया पहनना , बड़े - बड़े होटलों में घूमना - फिरना , स्वीमिंग करना , फिल्में देखना और फाइनली देर रात तक डिस्को में अंग्रेज़ी धुनों पर नाचना - गाना पसंद है। गुड , म्यूज़िक तो मुझे भी बहुत पसंद है। लेकिन , मुझे ये रीमिक्स वाले गाने तो बिलकुल ही पसंद नहीं। संगीत के अलावा और क्या - क्या शौक हैं आपके ? म्यूज़िक के अलावा मुझे हॉर्स राइडिंग पसंद है , लॉन्ग ड्राइव और हॉलीवुड मूवीज़ पसंद है। इसके अलावा और भी बहुत कुछ पसंद है , जब मिलोगी तब बताऊंगा। ओ . के। तो फिर कब मिल रही हैं आप ? देखते हैं। बताओ न , प्लीज़। क्या बात है ? बड़े बेताब हुए जा रहे हो मुझसे मिलने को ? ऐसा क्या है मुझमें ? और नहीं तो क्या , जिसकी आवाज़ ही इतनी खूबसूरत हो उससे पर्सनली मिलना भी तो चाहिए। पता तो चले कि ऊपर वाले ने मेरी किस्मत में कौन सा नायाब तोहफा लिखा है।

इतना ऊपर न चढ़ाओ मुझे कि कभी नीचे उतर ही न पाऊं। बताओ न यार , कब मिल रही हो ? ओके , कल तो मुझे शापिंग करने करोल बाग जाना है। क्यों न आप भी मेरे साथ चलें। जी , बिलकुल। आप बताएं , कितने बजे मिलेंगी ? मैं आपको आपके घर से ही पिक कर लूंगा। नहीं , आस - पड़ोस वाले फालतू में बाते बनाएंगे। सुबह मुझे अपनी सहेली के साथ शालीमार बाग में ही काम है , वहीं से मैं आपके घर आ जाऊंगी। कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न आपको ? नहीं , मुझे भला क्या प्रॉब्लम होनी है। मैं तो वैसे भी अकेला रहता हूं। आपने पता तो बताया ही नहीं ?

हां नोट करें , आपने ये केला गोदाम देखा है शालीमार का ? जी , अच्छी तरह। बस , उसी के साथ ही है। क्या BK-1 Block में ? नहीं , नहीं उस तरफ नहीं। दूसरी तरफ तो A-Pocket है। हां , उसी तरफ। इसका मतलब AA Block है आपका। नहीं यार , फिर कहां ? AA Block के साथ वो फोर्टिस वालों का अस्पताल बन रहा है न ? जी , बस उसी के साथ जो झुग्गी बस्ती है। हां , है। बस , उसी में ... उसी में घर है मेरा।

क्या ? जी , लेकिन तुम तो कह रहे थे कि अपना मकान है , छह कमरों का। अरे , दिल्ली में अपनी झुग्गी होना मतलब अपना मकान होना ही है। पूरी छह झुग्गियों पर कब्ज़ा है मेरा और उन्हीं में से तीन किराये पर उठाई हुई होंगी ? जी , तुम तो ये भी कह रहे थे कि अमृतसर में तुम्हारे पिताजी का टिम्बर का बिज़नस है ? हां , है न। वहीं सदर थाने के पास वाले चौक पर ' दातुन ' बेचने का बरसों पुराना काम है हमारा। क्या ? और ये जो तुम म्यूज़िक और घुड़सवारी के शौक के बारे में बता रहे थे , वह सब भी क्या धोखा था ? जानू , ना मैंने तुम्हें पहले कभी झूठ कहा और न ही अब कहूंगा।
ये सच है कि म्यूज़िक का मुझे बचपन से बड़ा शौक है और इसी वजह से मैंने दिल्ली आने के बाद शादी - ब्याहों में ढोल बजाने का काम शुरू किया। ओह , इसका मतलब तभी बैंड - बाजे वालों की सोहबत में रहते हुए कई तरह के म्यूज़िक इंस्ट्रूमंटस को बजाना सीख लिया होगा ? जी।...और यह घुड़सवारी भी आपने वहीं से सीखी ? जी , दरअसल क्या है कि बैंड - बाजे वालों के यहां घोड़ी वाले भी आते रहते थे , तो उनसे ही ये हुनर सीख लिया।जी , ओ . के।
तो फिर कल कितने बजे आ रही हो ? आ रही हूं ? सपने में भी ऐसे ख्वाब न देखना। क्यों , क्या हुआ ? इडियट , मेरे साथ डेट पर जाना चाहता है ? ऐसी हालत करवा दूंगी कि न किसी को कहते बनेगा न छिपाते। एक मिनट , चुप बिलकुल चुप। मुझे इतना बोल रही है , तो तू कौन सा आसमान से टपकी है ? जानता हूं , अच्छी तरह जानता हूं। जहां तू रहती है न , वहां की एक - एक गली से एक - एक चप्पे से वाकिफ हूं मैं। तुम्हारे यहां किसी की भी सौ रुपए से ज़्यादा की औकात नहीं है। आऊंगा , आऊंगा तेरी ही गली आऊंगा और तुझसे नहीं बल्कि तेरी ही पड़ोसन के साथ डेट पर जाऊंगा।

शटअप , यू ऑलसो शटअप। गो टू हेल ...

 

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4 comments:

संगीता पुरी said...

बहुत बहुत बधाई ... आगे और तरक्‍की के लिए शुभकामनाएं।

योगेन्द्र मौदगिल said...

पुनः बधाई...

ड़ा.योगेन्द्र मणि कौशिक said...

बहत खूब हँसने खिल खिलाने के साथ आजकल प्राइवट लोन कम्प्नीयों का सही दृष्य खिंचा है।बधाई हो।

Santhosh said...

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