खंजर दिल के आर-पार करता है

आज कल ब्लॉगजगत में जो हो रहा है या जो चल रहा है…उसे देख-सुन और पढकर कर अनायास ही ये पंक्तियाँ दिल से निकल पड़ी… आप सबके साथ बांटना चाहूँगा…

  heart...

 

कोई सामने से वार करता है

कोई छुप के प्रहार करता है

तोड़ के भरोसा मेरा हर कोई

खंजर दिल के आर-पार करता है 

13 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बात कुछ कम जमी।
राजीव जी,
आप अपने ब्लाग को विजेट फ्री क्यों नहीं करते? जब भी खोलते हैं पीसी को हेंग करता है। टिप्पणी करना तक कठिन हो जाता है। आप का ब्लाग खोलने के पहले सौ किलो वेट उठाने जैसी तैयारी करनी पड़ती है।

वाणी गीत said...

नफरतों की दीवार को ढके मुहब्बत की ढाल से
क्या मजाल जो कोई खंजर आर पार हो ...!!

खुशदीप सहगल said...

है अगर दुश्मन ज़माना तो गम नहीं, गम नहीं,
कोई आए, कहीं से,
हम किसी से कम नहीं, कम नहीं...
आज हम जैसे जिगर वाले कहां,
ज़ख्म खाया है दिल पे तब हुए हैं जवां,
तीर बन जाए दोस्तों की नज़र,
या बने खंजर दुश्मनों की ज़ुबां
आज तो दुनिया नहीं या हम नहीं,
कोई आए, कहीं से,
हम किसी से कम नहीं, कम नहीं...

जय हिंद...

ललित शर्मा said...

जब चाहे खंजर चला देते है लोग
आदमी का लहु पी जाते है लोग्।

Anil Pusadkar said...

हमसे मत किजिये दुश्मनों का गिला,
हम तो हैं दोस्तों के सताये हुये,
फ़िर रहें यंहा आज कुछ मेहरबां,
आस्तीनों मे खंजर छुपाये हुये।
हमसे मत किजीये दुश्मनों का …………………

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

sahi baat hai... kya pata kaun khanjar chala de.. lekin theek hai likhte rahen.

राज भाटिय़ा said...

अरे अरे राजीव जी... मुझे तो तरस आता है उन हसीनॊ पर जो आप पर प्यार से वार करती है दिनेश जी की बात बहुत सही है, पता नही आप ने वार से बचने के लिये अपने ब्लांग को ऎसा सुरक्षित बना लिया, जब भी आते है फ़ंस जाते है यानि हमारा लेपटाप हेंग हो जाता है

Udan Tashtari said...

बिल्कुल सही कहा!

M VERMA said...

कोई सामने से वार करता है
कोई छुप के प्रहार करता है
तोड़ के भरोसा मेरा हर कोई
खंजर दिल के आर-पार करता है
दिल के आर-पार अगर खंजर हो जाता है तो खंजर का क्या कसूर! दिल थोड़ा और मजबूत करें.

दीपक 'मशाल' said...

Ae dil dil ki dunia me aisa haal bhi hota hai.. don't worry sir ji

चंदन कुमार झा said...

बहुत मार्मिक !!!! :)

विनोद कुमार पांडेय said...

यही हर जगह हाल है सावधान रहने की ज़रूरत है..आदमी बदल रहें है...बढ़िया अभिव्यक्ति..धन्यवाद.

शरद कोकास said...

किसका है पता नही पर एक शेर याद आ गया
" खंजर से करो बात न तलवार से पूछो ,
मै कैसे हुआ कत्ल मेरे यार से पूछो .."
अरे वाह वाह तो करो भाई.....।

 
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