बोलो तारा रारा-राजीव तनेजा

slap

शरद को हरविंदर मिला करके लम्बे हाथ
करके लम्बे हाथ   थप्पड़ जोर से मारा
थप्पड़ जोर से मारा काबू रहा ना गुस्से पे

चढ गया ऊपर पारा….

चढ गया ऊपर पारा

सूज गयी सारी आँख सूज गया बूत्था सारा

सारे मिल के बोलो  तारा रारा…तारा रारा

***राजीव तनेजा***

9 comments:

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

तारा रारा…तारा रारा :)))

बोल दिए जी।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह जी वाह तारा रा रा

अरूण साथी said...

साधु-साधु

शिवम् मिश्रा said...

तारा रारा…तारा रारा :)

डॉ टी एस दराल said...

अरा अरा अरा !
हमारी मर्ज़ी , हम कुछ भी बोलें ! :)
क्या सन्यास ले लिया था भाई !

वन्दना said...

हा हा हा………ता रा रा

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

ajit gupta said...

इसे कहते हैं दिन में भी तारे दिखना। तारे रा रे रा

Rakesh Kumar said...

अटल जी कह रहे हैं

यह अच्छी बात नही.

अन्ना का कहना तो सब जानते ही हैं.

फिर मैं क्या कहूँ

बोलो ता रा रा रा

 
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